पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- बिम्सटेक (BIMSTEC) के सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें आतंकवाद, साइबर खतरों, समुद्री सुरक्षा संबंधी चुनौतियों तथा उभरते सुरक्षा जोखिमों के विरुद्ध क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की गई।
प्रमुख बिंदु
- सदस्य देशों ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) के समुद्री घटक के लिए दिशा-निर्देशों को अपनाया।
- ये दिशा-निर्देश बिम्सटेक सदस्य देशों को क्षेत्र में आपदा राहत कार्यों को त्वरित एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने में सहायता प्रदान करेंगे।
- सदस्य देशों ने समुद्र में परस्पर संपर्क के दौरान समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों के आचरण हेतु मार्गदर्शक सिद्धांतों के एक समूह को भी अनुमोदित किया।
बिम्सटेक (BIMSTEC) क्या है?
- बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC) बंगाल की खाड़ी के तटीय एवं समीपवर्ती क्षेत्रों में स्थित सात सदस्य देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है।
- इस संगठन की स्थापना 1997 में बैंकॉक घोषणा पर हस्ताक्षर के साथ हुई।
- यह बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण एशिया तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को एक साझा मंच प्रदान करता है।
- संस्थापक सदस्य (1997):
- बांग्लादेश
- भारत
- श्रीलंका
- थाईलैंड
- वर्तमान सदस्य :
- बांग्लादेश
- भूटान
- भारत
- म्यांमार
- नेपाल
- श्रीलंका
- थाईलैंड
- उद्देश्य: सदस्य देशों के आर्थिक विकास को गति प्रदान करना।
- सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करना।
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा आर्थिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देना।
- बिम्सटेक क्षेत्र में लगभग 1.7 अरब जनसंख्या निवास करती है, जो विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 22 प्रतिशत है। इस क्षेत्र का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।
- सचिवालय: बिम्सटेक का सचिवालय ढाका (बांग्लादेश) में स्थित है।
भारत के लिए बिम्सटेक का महत्त्व
- दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के मध्य सेतु: बिम्सटेक भारत को म्यांमार और थाईलैंड के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया तथा बंगाल की खाड़ी क्षेत्र से जोड़ता है।
- यह कलादान बहु-माध्यम पारगमन परिवहन परियोजना तथा भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना जैसी पहलों को समर्थन प्रदान करता है।
- चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन: बिम्सटेक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक एवं कूटनीतिक भूमिका को सुदृढ़ करता है।
- यह चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के एक प्रभावी क्षेत्रीय विकल्प के रूप में भी उभरता है।
- समुद्री सुरक्षा: बंगाल की खाड़ी भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति तथा ऊर्जा व्यापार मार्गों की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- पूर्वोत्तर भारत के विकास में सहायक: यह पूर्वोत्तर भारत के विकास तथा उसे क्षेत्रीय बाजारों से जोड़ने के नए अवसर उपलब्ध कराता है।
- बंगाल की खाड़ी : ऊर्जा केंद्र के रूप में: तेल एवं प्राकृतिक गैस के अन्वेषण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा नीली अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ उपलब्ध हैं।
- साझी सभ्यतागत विरासत: सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत, विशेषकर बौद्ध धर्म, एक महत्त्वपूर्ण साझा आधार है।
- इससे क्षेत्रीय पर्यटन, बौद्ध परिपथों के विकास तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है।
- दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) का प्रभावी विकल्प: भारत–पाकिस्तान संबंधों में तनाव के कारण दक्षेस (SAARC) की गतिविधियाँ लंबे समय से प्रभावित रही हैं।
- ऐसी स्थिति में बिम्सटेक क्षेत्रीय सहयोग के अधिक सक्रिय एवं प्रभावी मंच के रूप में उभरा है।
चुनौतियाँ
- राजनीतिक अस्थिरता: म्यांमार में जारी गृह-संघर्ष ने क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं, विशेषकर भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग तथा कलादान बहु-माध्यम पारगमन परिवहन परियोजना को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
- संस्थागत कमजोरी: बिम्सटेक सचिवालय के पास वित्तीय एवं मानव संसाधनों की सीमित उपलब्धता है, जिससे निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं निगरानी की क्षमता प्रभावित होती है।
- द्विपक्षीय विवाद: बांग्लादेश–म्यांमार सीमा विवाद तथा सदस्य देशों के बीच समय-समय पर उत्पन्न होने वाले कूटनीतिक मतभेद सर्वसम्मति आधारित निर्णय-निर्माण में बाधा उत्पन्न करते हैं।
- अपूर्ण आर्थिक एकीकरण: बिम्सटेक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर लंबे समय से जारी वार्ताओं के निष्कर्ष तक न पहुँच पाने के कारण व्यापार, निवेश तथा क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं के विकास की संभावनाएँ सीमित बनी हुई हैं।
निष्कर्ष
- बंगाल की खाड़ी का रणनीतिक एवं आर्थिक महत्त्व निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में बिम्सटेक के पास दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में उभरने की व्यापक क्षमता है।
- यदि यह संगठन अपनी प्रतिबद्धताओं को प्रभावी क्रियान्वयन में परिवर्तित करने में सफल होता है, तो यह सुरक्षित, परस्पर जुड़ा हुआ, लचीला तथा समृद्ध बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही, यह भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’, ‘एक्ट ईस्ट’ तथा ‘महासागर’ (MAHASAGAR) दृष्टि को भी सुदृढ़ आधार प्रदान करेगा।
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